“Knee Osteoarthritis (घुटनों का दर्द) है तो खूब घूमो, उठक-बैठक करो और खूब सीढ़ियाँ चढ़ो” — ज्ञानचंद और रायचंद वाली सलाह कैसे घुटनों के लिए ज़हर बन जाती है?
🔶 भूमिका: जब बीमारी Cartilage की होती है और सलाह Ego से दी जाती है
भारत में Knee Osteoarthritis केवल एक बीमारी नहीं है बल्कि यह गलत सलाहों से धीरे-धीरे बिगड़ाई जाने वाली स्थिति है।
जब किसी व्यक्ति को घुटनों में दर्द, जकड़न, सूजन या चलने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर से पहले जिन लोगों की आवाज़ आती है, वे होते हैं:
“हमारे गाँव के ज्ञानचंद”
“मोहल्ले के रायचंद”
“फलाँ रिश्तेदार जिन्हें 20 साल पहले घुटने में दर्द हुआ था”
और उनकी सलाह लगभग एक जैसी होती है:
“घूमो खूब, जितना चलोगे उतना सही होगा”
“उठक-बैठक करो, घुटना मज़बूत होगा”
“सीढ़ियाँ चढ़ो, घुटना जाम नहीं होना चाहिए”
यह सलाह सुनने में प्रेरणादायक, लेकिन विज्ञान की कसौटी पर ज़हरीली होती है।
🔶 Knee Osteoarthritis असल में है क्या? (जो ज्ञानचंद और रायचंद कभी नहीं बताते)
Knee Osteoarthritis मतलब:
▫️घुटने के अंदर मौजूद Articular Cartilage का घिसना
▫️Joint Space का कम होना
▫️Synovial inflammation
▫️Muscles का imbalance
▫️Load सहने की क्षमता का घट जाना
👉 यानी समस्या कम चलने की नहीं,
👉 समस्या है गलत तरह से ज़्यादा load पड़ने की।
लेकिन ज्ञानचंद और रायचंद की सलाह का मूल तर्क होता है:
“चलोगे नहीं तो जाम हो जाएगा”
जबकि सच्चाई यह है:
“गलत चलोगे तो जल्दी खत्म हो जाएगा”
🔶 Movement ज़रूरी है, लेकिन हर Movement इलाज नहीं होती:—
🚫यह सबसे बड़ा भ्रम है:
Movement = Treatment
नहीं।
✔️सही वाक्य है:
Controlled, Specific, Scientific Movement = Treatment
और जो ज्ञानचंद और रायचंद बताते हैं वह होता है:
❗बिना Warm-up के चलना
❗बिना Muscle Strength के सीढ़ियाँ चढ़ना
❗बिना Alignment सुधारे उठक-बैठक करना
यह Movement नहीं, Biomechanical Assault है।
🔶 उठक-बैठक: भारतीय संस्कृति का गौरव या Knee OA का सबसे खतरनाक व्यायाम ?
उठक-बैठक में घुटने पर:
❌6–7 गुना Body Weight का Load
❌Extreme Flexion में Cartilage Compression
❌Patellofemoral Joint पर भारी Stress
अब सोचिए जिस Cartilage की Thickness पहले ही कम है, उसे रोज़ कुचलना क्या सही करेगा ?
नहीं ❌
➡️ “Strength” नहीं बढ़ाएगा
➡️ “घिसाव” बढ़ाएगा
ज्ञानचंद और रायचंद इसे कहते हैं:
“हम तो रोज़ करते थे”
लेकिन ज्ञानचंद और रायचंद यह नहीं बताते कि:
🔹तब Cartilage नया था
🔹वजन कम था
🔹Alignment सही थी
🔹उम्र 25 थी, 55 नहीं
🔶 सीढ़ियाँ चढ़ना:—
Exercise या Degeneration Accelerator ?
सीढ़ियाँ चढ़ते समय:
⚠️Knee Joint पर 3–4 गुना Load
⚠️Quad muscles की ज़्यादा मांग
⚠️Poor control होने पर Joint Shear Forces
अब Knee OA में:
❌Quad Weak होता है
❌Pain inhibition रहती है
❌Joint already inflamed होता है
तो सीढ़ियाँ चढ़ना बन जाता है:
“Joint को बार-बार remind करना कि तुम कमजोर हो”
और ज्ञानचंद कहते हैं:
“दर्द होगा तो ठीक हो जाएगा”
जबकि Pain असल में कहता है:
“रुको, तुम मुझे नुकसान पहुँचा रहे हो”
🔶 “दर्द सहो” वाली सलाह — सबसे खतरनाक भ्रम:—
ज्ञानचंद का पसंदीदा डायलॉग:
“दर्द तो होगा ही, सहना पड़ेगा”
लेकिन Pain का मतलब होता है:
❗Inflammation बढ़ रही है
❗Joint Overloaded है
❗Tissue Damage हो रहा है
Pain कोई Character Test नहीं है,
Pain एक Biological Alarm है।
और जो इस Alarm को ignore करता है,
वह Repair नहीं, Replacement की ओर जाता है।
🔶 क्यों यह सलाह इतनी जल्दी फैलती है?
क्योंकि:
🔴यह Simple है
🔴यह Effortless Advice है
🔴इसमें जिम्मेदारी नहीं होती
ज्ञानचंद यह नहीं कहता:
⚠️कितना चलना?
⚠️कब चलना?
⚠️किस सतह पर?
⚠️किस जूते में?
⚠️किस दर्द स्तर तक?
Physiotherapist यह सब पूछता है, इसलिए उसकी सलाह “धीमी” लगती है।
🔶 Physiotherapy क्या कहती है ? (जो रायचंद नहीं समझते)
Physiotherapy कहती है:
✔️पहले Pain Control
✔️पहले Inflammation Control
✔️पहले Muscle Activation
✔️फिर Strength
✔️फिर Function
✔️फिर Load
यह Stepwise Healing है, न कि “चलो और भगवान भरोसे”
🔶 गलत सलाह का अंतिम परिणाम:—
ज्ञानचंद की सलाह से:
OA Grade 1 → Grade 3
Pain episodic → Constant
Exercise helpful → Harmful
Treatment conservative → Surgery
और फिर वही ज्ञानचंद और रायचंद कहते हैं:
“अब तो ऑपरेशन ही उपाय है”
🔶 निष्कर्ष:—
ज्ञानचंद को सुने या विज्ञान को?
👉🏻चलना ज़रूरी है लेकिन सोच के साथ
👉🏻उठना-बैठना ज़रूरी है लेकिन सही angle पर
👉🏻सीढ़ियाँ चढ़ना ज़रूरी है लेकिन सही समय पर
👉🏻Knee osteoarthritis कमज़ोरी की बीमारी नहीं, गलत उपयोग की बीमारी है।
✍️ अंतिम पंक्ति (Patient Awareness Quote):
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