जब खेत में फसल से अधिक खरपतवार उग आए — तो न किसान समृद्ध होता है, न फसल सुरक्षित रहती है; और आज फिजियोथेरेपी डिग्री कोर्सेज़ में यही शैक्षणिक संकट जन्म ले चुका है
प्रस्तावना : खेत और शिक्षा — एक गहरी समानता:—
भारतीय समाज में खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि एक दर्शन है। किसान जानता है कि खेत में क्या बोया जाए, कितना बोया जाए और क्या हटाया जाए, तभी फसल सुरक्षित रहती है। यदि खेत में फसल से अधिक खरपतवार उग आए, तो खेत बाहर से भले ही हरा-भरा दिखे, लेकिन भीतर से वह खोखला, बीमार और अलाभकारी हो जाता है।
आज ठीक यही स्थिति फिजियोथेरेपी शिक्षा प्रणाली की हो चुकी है। Non Medical Private डिग्री कॉलेजों, शॉर्ट-टर्म कोर्सेज़, ऑनलाइन सर्टिफिकेट्स, अनियमित गैर चिकित्सा विश्वविद्यालयों और बिना मानक के खुले संस्थानों की संख्या इतनी बढ़ चुकी है कि–
अब सवाल यह नहीं रहा कि फिजियोथेरेपिस्ट कितने हैं?
बल्कि यह है कि–
👉 योग्य, प्रशिक्षित और नैतिक फिजियोथेपिस्ट कितने बचे हैं?
1. खेत में खरपतवार क्या करता है — और शिक्षा में उसका रूप क्या है?
(क) कृषि में खरपतवार
खरपतवार:
🔸फसल का पोषण छीन लेता है
🔸मिट्टी की उर्वरता घटाता है
🔸कीट और रोगों को बढ़ावा देता है
🔸किसान की मेहनत और लागत दोनों बर्बाद करता है
(ख) शिक्षा में खरपतवार
फिजियोथेरेपी शिक्षा में खरपतवार का अर्थ है:
🔸बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के कॉलेज
🔸अपर्याप्त क्लिनिकल एक्सपोज़र
🔸अयोग्य या पार्ट-टाइम फैकल्टी
🔸केवल फीस आधारित एडमिशन
🔸डिग्री बाँटने की फैक्ट्री जैसा सिस्टम
परिणाम:
❌डिग्री है, दक्षता नहीं
❌आत्मविश्वास है, ज्ञान नहीं
❌मरीज है, पर सही उपचार नहीं
2. संख्या बनाम गुणवत्ता : सबसे बड़ा भ्रम:—
आज गर्व से कहा जाता है —
“भारत में हजारों फिजियोथेरेपी कॉलेज हैं”
लेकिन कोई यह नहीं पूछता —
❔कितने कॉलेज मानक पर खरे उतरते हैं?
❔कितने छात्रों को हाथ से मरीज देखने का अवसर मिलता है?
❔कितने स्नातक स्वतंत्र क्लिनिकल निर्णय लेने में सक्षम हैं?
👉 जैसे खेत में ज्यादा पौधे होने से ज्यादा अनाज नहीं मिलता, वैसे ही ज्यादा डिग्रियों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ नहीं मिलतीं।
3. जब शिक्षा अनियंत्रित होती है, तो मरीज सबसे पहले प्रभावित होता है:—
यह मान लेना एक गंभीर भूल है कि शिक्षा की गिरावट का असर केवल पेशे पर पड़ता है।
सच यह है कि:
❌गलत मूल्यांकन
❌अधूरी रिहैबिलिटेशन
❌दर्द दबाने वाला उपचार
❌संरचना पर ध्यान, फ़ंक्शन पर नहीं
👉 इन सबका सीधा नुकसान मरीज को होता है।
आज मरीज कहता है:
“फिजियोथेरेपी करवाई थी, पर फायदा नहीं हुआ”
❗यह वाक्य पेशे की असफलता नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की विफलता का प्रमाण है।
4. नियमन का अभाव : सबसे उपजाऊ भूमि में उगा खरपतवार:—
खेती में यदि:
🔸निराई-गुड़ाई न हो
🔸फसल चक्र न अपनाया जाए
🔸बीज प्रमाणित न हों
⚠️तो खेत बर्बाद होता है।
उसी तरह, फिजियोथेरेपी शिक्षा में:
❌स्पष्ट राष्ट्रीय मानक नहीं
❌प्रभावी निरीक्षण नहीं
❌सख़्त दंड नहीं
❌फर्जी संस्थानों पर कार्रवाई नहीं
👉 यही कारण है कि खरपतवार बेलगाम हो गया।
5. डिग्री मिल रही है, पहचान खो रही है:—
आज असली मेडिकल फिजियोथेरेपिस्ट:
❗खुद को साबित करने में लगा है
❗डॉक्टरों के सामने असुरक्षित है
❗मरीजों के सामने संदिग्ध
❗और सिस्टम में उपेक्षित
क्यों?
⚠️क्योंकि जब हर दूसरा व्यक्ति गैर चिकित्सा संस्थान से डिग्रीधारी बन जाए, तो डिग्री की विश्वसनीयता खत्म हो जाती है।
यह वही स्थिति है जैसे —
“जब हर खरपतवार का पौधा फसल कहलाने लगे, तो अनाज के पौधे की कीमत गिर जाती है”
6. किसान जानता है — समय पर खरपतवार न हटाओ तो फसल मर जाती है:—
खेती का एक नियम है:
“खरपतवार छोटा हो तभी हटाओ, वरना वह जड़ पकड़ लेता है”
फिजियोथेरेपी शिक्षा में:
👉यदि अभी सुधार नहीं हुआ
👉यदि अभी नियमन नहीं आया
👉यदि अभी गुणवत्ता को प्राथमिकता नहीं मिली
तो आने वाले समय में:
❗पेशा अपनी स्वायत्तता खो देगा
❗बाहरी हस्तक्षेप बढ़ेगा
❗फिजियोथेरेपिस्ट तकनीशियन बनकर रह जाएगा
7. समाधान : निराई-गुड़ाई जरूरी है, विनाश नहीं:—
यह लेख किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि पेशे के संरक्षण के लिए है।
आवश्यक कदम:
1. कॉलेजों की संख्या नहीं, गुणवत्ता तय हो
2. क्लिनिकल घंटे और केस-लोड अनिवार्य हों
3. फैकल्टी की योग्यता पर सख़्ती
4. फर्जी और नाममात्र संस्थानों का बंद होना
5. एक मज़बूत, स्वतंत्र और वैज्ञानिक नियामक संस्था
👉 जैसे किसान फसल बचाने के लिए खरपतवार हटाता है, वैसे ही पेशे को बचाने के लिए अनावश्यक गैर चिकित्सा संस्थान हटाने होंगे।
निष्कर्ष : हर हरी चीज़ फसल नहीं होती—
खेत चाहे कितना भी हरा दिखे, यदि उसमें अनाज नहीं है, तो वह किसान को भूखा ही रखेगा। उसी तरह हर डिग्री, हर कॉलेज और हर सर्टिफिकेट अच्छा Physiotherapist होने का प्रणाम नहीं है
अब समय आ गया है कि:
✔️हम संख्या के नशे से बाहर आएँ
✔️गुणवत्ता को पहचानें
✔️और पेशे की जड़ों को मजबूत करें
क्योंकि — जब खेत में फसल से ज्यादा खरपतवार उग जाए, तो सबसे पहले भविष्य की फसल खतरे में पड़ती है। और आज फिजियोथेरेपी का भविष्य उसी खेत में खड़ा है।

