मंगलवार, 27 जनवरी 2026

जवाब में डॉक्टर साहब ने सिर्फ इतना कहा – “नहीं नहीं” || लेकिन क्यों नहीं?, कब तक नहीं?, क्या विकल्प हैं? और आगे क्या करना है? — यह न बताना ही आधुनिक चिकित्सा संवाद की सबसे खतरनाक विफलता है

यह वाक्य सिर्फ एक अनुभव नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था पर एक गहरा आरोप है—

“जवाब में डॉक्टर साहब ने सिर्फ इतना कहा – “नहीं नहीं” || लेकिन क्यों नहीं?, कब तक नहीं?, क्या विकल्प हैं? और आगे क्या करना है? — यह न बताना ही आधुनिक चिकित्सा संवाद की सबसे खतरनाक विफलता है”


“नहीं नहीं” कहना आसान है, समझाना जिम्मेदारी है


आधुनिक चिकित्सा संवाद की सबसे बड़ी त्रासदी:–


     आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने तकनीक, दवाओं और सर्जरी के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। MRI, CT Scan, Robotic Surgery, AI-based diagnostics—सब कुछ उपलब्ध है। लेकिन एक चीज जो लगातार कमजोर होती गई है, वह है डॉक्टर और मरीज के बीच का संवाद (Doctor–Patient Communication)।
     आज का मरीज सबसे ज्यादा जिस चीज से टूटता है, वह बीमारी नहीं होती, बल्कि अधूरी जानकारी, अस्पष्ट जवाब और बस “नहीं नहीं” कहकर बात खत्म कर देना होता है।


जब ‘नहीं’ एक दीवार बन जाता है:—


कल्पना कीजिए—

मरीज जब डॉक्टर से पूछता है:
“डॉक्टर साहब, यह इलाज हो सकता है❓”
उत्तर मिलता है:
“नहीं नहीं”❗ (ये लो हो गई सलाह पूरी)

लेकिन इसके बाद—
❓क्यों नहीं? ❌
❓हमेशा के लिए नहीं या अभी नहीं? ❌
❓कोई वैकल्पिक रास्ता है या नहीं? ❌
❓अगर इलाज नहीं तो जीवन कैसे जिएं? ❌
❓क्या सावधानी रखें, क्या करें, क्या न करें? ❌

कुछ भी नहीं बताया जाता।

यह “नहीं नहीं” इलाज का निषेध नहीं होता, बल्कि यह उम्मीद, दिशा और भरोसे का निषेध बन जाता है।

आधुनिक चिकित्सा की सबसे खतरनाक विफलता क्यों?


1️⃣ क्योंकि मरीज शरीर नहीं, इंसान होता है:—


चिकित्सा विज्ञान अक्सर मरीज को सिर्फ एक case मान लेता है— MRI रिपोर्ट, X-ray, Lab values, Diagnosis code

लेकिन मरीज—
▫️डर के साथ आता है
▫️भ्रम के साथ आता है
▫️परिवार की जिम्मेदारी लेकर आता है
▫️भविष्य की चिंता लेकर आता है

जब उसे सिर्फ “नहीं नहीं” सुनाई देता है, तो उसे लगता है कि अब आगे कुछ नहीं हो सकता।

2️⃣ क्योंकि अधूरी जानकारी डर पैदा करती है:—


डर अज्ञान से पैदा होता है। और चिकित्सा में सबसे खतरनाक चीज है अज्ञान के साथ डर।

जब डॉक्टर नहीं बताते—
❔बीमारी का प्राकृतिक कोर्स क्या है
❔सुधार संभव है या नहीं
❔बिगड़ने से कैसे रोकें
❔जीवनशैली कैसे बदलें

तो मरीज:
🔸Google का सहारा लेता है
🔸गलत इलाज की ओर जाता है
🔸झोलाछाप, चमत्कार, फर्जी थैरेपी का शिकार बनता है


3️⃣ क्योंकि “नहीं नहीं” के बाद का सन्नाटा आत्मघाती हो सकता है


बहुत से मरीजों के लिए डॉक्टर अंतिम उम्मीद होता है। जब वही डॉक्टर—
❌बिना समझाए
❌बिना विकल्प बताए
❌बिना मार्गदर्शन दिए

सिर्फ “नहीं नहीं” कह देता है, तो यह मरीज के लिए मानसिक आघात बन जाता है।
डिप्रेशन, एंग्जायटी, आत्म-हीनता— सब यहीं से शुरू होते हैं।


डॉक्टर क्या सोचता है, मरीज क्या समझता है


डॉक्टर का अर्थ और मरीज की समझ की व्याख्या:—


👉🏻 “इलाज संभव नहीं”— डॉक्टर के लिए यह वाक्य चिकित्सा विज्ञान की सीमा को दर्शाता है, जहाँ curative treatment उपलब्ध नहीं होता, लेकिन मरीज इसे इस तरह समझता है कि अब कोई उम्मीद नहीं बची और जीवन का रास्ता यहीं खत्म हो गया है।

👉🏻 “अभी सर्जरी नहीं”— डॉक्टर के मन में इसका अर्थ होता है कि वर्तमान समय या स्थिति सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं है और आगे मूल्यांकन की जरूरत है, जबकि मरीज इसे यह मान लेता है कि सर्जरी कभी होगी ही नहीं और वह कभी ठीक नहीं हो पाएगा।

👉🏻 “यह मेरी फील्ड नहीं”— डॉक्टर इसे पेशेवर ईमानदारी और सही विशेषज्ञ के पास भेजने की जिम्मेदारी मानता है, लेकिन मरीज इसे इस तरह ग्रहण करता है कि कोई भी डॉक्टर उसकी मदद करने को तैयार नहीं है।

👉🏻 “देखते हैं”— डॉक्टर के लिए यह एक clinical observation और follow-up की प्रक्रिया का संकेत होता है, पर मरीज इसे उदासीनता के रूप में समझता है और महसूस करता है कि डॉक्टर को उसकी परेशानी की परवाह नहीं है।

✔️ निष्कर्ष —यह अंतर इसलिए पैदा होता है क्योंकि डॉक्टर तथ्य और विज्ञान की भाषा में सोचता है, जबकि मरीज डर, उम्मीद और भविष्य की चिंता की भाषा में सुनता है—और यही असंतुलन संवाद की वह खाई बन जाता है जो सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाती है।

‘नहीं’ के साथ क्या-क्या बताया जाना चाहिए?


✔️ 1. क्यों नहीं:

❔क्या बीमारी की प्रकृति ऐसी है?
❔क्या समय निकल गया है?
❔क्या जोखिम ज्यादा है?

डॉक्टर से कारण पता करना मरीज का अधिकार है। पर मरीज सवाल करने से डर जाता है कि कहीं डॉक्टर नाराज ना हो जाये ❗

✔️ 2. कब तक नहीं:

❔अभी नहीं या कभी नहीं?
❔कुछ समय बाद पुनर्मूल्यांकन होगा?

“अभी नहीं” और “कभी नहीं”— इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है❗

✔️ 3. क्या विकल्प हैं:

❔Conservative management
❔Physiotherapy / Rehabilitation
❔Lifestyle modification
❔Pain management
❔Second opinion

इलाज न सही, मरीज को जीने का रास्ता तो बताया जा सकता है❗

✔️ 4. अब आगे क्या करना है:

❔क्या गतिविधि करें
❔क्या न करें
❔किस लक्षण पर तुरंत आएं
❔फॉलो-अप कब

मरीज को खाली हाथ नहीं लौटाया जाना चाहिए❗


आधुनिक चिकित्सा का भ्रम:- “मरीज समझ नहीं पाएगा” यह सबसे खतरनाक सोच है।

आज का मरीज:
🔹पढ़ा-लिखा है
🔹सवाल पूछता है
🔹जानकारी चाहता है

अगर आप नहीं बताएंगे, तो वह कहीं और से—अक्सर गलत जगह से—जानकारी लेगा।


समय की कमी बहाना है, समाधान नहीं:—


यह सच है कि OPD में समय कम होता है।
लेकिन—
🔹2 मिनट का स्पष्ट संवाद
🔹10 सेकंड का सहानुभूतिपूर्ण वाक्य
🔹1 कागज पर लिखी सलाह
मरीज के लिए जीवन बदल सकती है।

आधुनिक चिकित्सा को क्या सीखना होगा?

🔹 Treat the disease, but guide the person
🔹 Cure is not always possible, care is
🔹 Silence is not neutrality, it is neglect
🔹 Communication is also a form of treatment

फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन का उदाहरण:—


(विशेष रूप से प्रासंगिक)

जब न्यूरोलॉजिकल या ऑर्थोपेडिक मरीज से कहा जाता है—

“अब कुछ नहीं हो सकता”

असल में सच्चाई होती है—
❔Recovery नहीं, adaptation संभव है
❔Normal नहीं, functional जीवन संभव है
लेकिन यह बात अगर नहीं समझाई गई, तो मरीज इलाज छोड़ देता है।

निष्कर्ष:—
‘नहीं नहीं ’ कहना अपराध नहीं है, लेकिन ‘नहीं’ कहकर चुप हो जाना—यह पेशेवर डॉक्टर की विफलता है।

आधुनिक चिकित्सा को यह समझना होगा कि—
🔹मरीज सिर्फ इलाज नहीं चाहता
🔹वह स्पष्टीकरण, दिशा और भरोसा चाहता है
अगर डॉक्टर यह नहीं देता, तो तकनीक, डिग्री और अनुभव—सब व्यर्थ हो जाते हैं।

अंतिम पंक्ति:—

 “एक अच्छा डॉक्टर वह नहीं है जो हमेशा ‘हाँ’ कहे, बल्कि वह है जो ‘नहीं’ के बाद भी मरीज को अकेला न छोड़े”

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