“अधिकांश न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में जहाँ दवाओं की भूमिका केवल लगभग 20% तक सीमित होती है और वास्तविक कार्यात्मक सुधार व स्वतंत्र जीवन की वापसी में फिजियोथेरेपी की भूमिका लगभग 80% होती है, वहाँ डॉक्टर-केंद्रित मानसिकता न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास की सबसे बड़ी और गंभीर बाधा बन जाती है”
🧠 अधिकांश न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में—
💊 दवाओं की भूमिका ≈ 20%
🏃♂️ फिजियोथेरेपी की भूमिका ≈ 80%
यह प्रतिशत कठोर गणित नहीं, बल्कि क्लिनिकल रियलिटी को दर्शाता है।
क्यों न्यूरोलॉजी में फिजियोथेरेपी की भूमिका प्रमुख है?
1️⃣ दवा बीमारी रोक सकती है, कार्यक्षमता नहीं लौटाती:—
दवा बीमारी की प्रगति को रोक या धीमा कर सकती है, लेकिन वह खोई हुई कार्यात्मक क्षमता को वापस नहीं ला सकती। स्ट्रोक, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, पार्किन्सन रोग, सेरेब्रल पाल्सी (CP), गुइलेन–बार्रे सिंड्रोम (GBS) और मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में दवाओं की भूमिका मुख्यतः न्यूरोनल डैमेज को सीमित करने और रोग को स्थिर रखने तक होती है; जबकि चलना, बैठना, संतुलन बनाए रखना और हाथों का प्रभावी उपयोग जैसी दैनिक क्रियाओं की वास्तविक वापसी केवल संरचित, निरंतर और लक्ष्य-आधारित रिहैबिलिटेशन एवं फिजियोथेरेपी के माध्यम से ही संभव होती है।
2️⃣ Neuroplasticity को दवा नहीं, movement activate करता है:—
न्यूरोप्लास्टिसिटी को दवाएं नहीं बल्कि सार्थक और नियंत्रित मूवमेंट सक्रिय करता है, क्योंकि मस्तिष्क का पुनर्गठन और नए neural pathways का निर्माण केवल सक्रिय उपयोग और अनुभव के माध्यम से ही संभव होता है। यह प्रक्रिया task-specific, repetitive और goal-oriented physiotherapy से प्रभावी रूप से संचालित होती है, जिसमें मरीज बार-बार उद्देश्यपूर्ण गतिविधियाँ करता है, जिससे मस्तिष्क नए कनेक्शन बनाकर खोई हुई या प्रभावित कार्यक्षमता की भरपाई करना सीखता है।
3️⃣ Long-term outcome = Physiotherapy dependent:—
न्यूरोलॉजिकल रोगों में लॉन्ग-टर्म आउटकम मुख्यतः फिजियोथेरेपी पर निर्भर करता है, क्योंकि दवाओं की भूमिका प्रायः केवल acute phase तक सीमित रहती है और उनका उद्देश्य बीमारी को स्थिर करना होता है। इसके विपरीत, मरीज की कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता, गतिशीलता और जीवन-गुणवत्ता का पूरा जीवनभर का सफर निरंतर, वैज्ञानिक और लक्ष्य-आधारित फिजियोथेरेपी ही तय करती है।
सबसे बड़ी बाधा: 🧠 Doctor-Centric Mentality:—
❌ “दवा ही इलाज है” वाली सोच—
Rehabilitation को secondary समझना😕
Physiotherapy को referral-based और dependent रखना😕
❌ मरीज की functional जरूरतों को नजरअंदाज करना—
मरीज पूछता है:
“डॉक्टर साहब मैं फिर चल पाऊँगा ?”
जवाब मिलता है:
“दवा चल रही है ना”
❔क्या होना चाहिए? (Solution):—
✅न्यूरोलॉजिकल देखभाल में Team-Based, Patient-Centric Model अपनाया जाना चाहिए, जिसमें उपचार का केंद्र बीमारी नहीं बल्कि मरीज की कार्यक्षमता और जीवन-गुणवत्ता हो। इस मॉडल में Neurologist का दायित्व सटीक निदान करना और चिकित्सकीय स्थिरता सुनिश्चित करना होता है।
Physiotherapist मरीज की गतिशीलता, कार्यात्मक स्वतंत्रता और दीर्घकालीन गुणवत्ता-पूर्ण जीवन को पुनर्स्थापित करने पर कार्य करता है; जबकि Occupational Therapist (OT) और Speech Therapist दैनिक जीवन की गतिविधियों, आत्मनिर्भरता और संचार क्षमताओं के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Bottom Line (One-liner):—
Neurology में दवा मरीज को “जिंदा” रखती है, फिजियोथेरेपी उसे “जिंदगी” लौटाती है।
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