रविवार, 26 अक्टूबर 2025

“BPT कोर्स इसलिये ज्वाइन किया है, ताकि नाम के आगे ‘Doctor’ लग जाये — ज्यादातर Students का Mindset”

 “BPT कोर्स इसलिये ज्वाइन किया है ताकि नाम के आगे ‘Doctor’ लग जाये — ज्यादातर Students का Mindset”

    आज के समय में जब कोई छात्र Bachelor of Physiotherapy (BPT) कोर्स ज्वाइन करता है, तो उसका उद्देश्य अक्सर “सेवा” या “science of human movement” सीखना नहीं होता, बल्कि “नाम के आगे doctor लगाने” की चाहत ज़्यादा होती है। यह सोच केवल status symbol बन चुकी है — और यहीं से एक बड़ी मानसिक भूल शुरू होती है।

💭 1. Mindset की जड़ — ‘Doctor’ शब्द का आकर्षण:
    भारतीय समाज में “Doctor” शब्द सम्मान, प्रतिष्ठा और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। बहुत सारे विद्यार्थी जब BPT कोर्स में प्रवेश लेते हैं, तो उनका पहला वाक्य यही होता है —

 “Doctor बनना है, चाहे MBBS न भी मिले”

यानी कोर्स का चुनाव Passion या Interest से नहीं, बल्कि Designation के लालच से किया जाता है।

⚕️ 2. ‘Doctor’ और ‘Physiotherapist’ में फर्क समझना जरूरी है:

      Physiotherapist का असली परिचय उसकी clinical reasoning, biomechanics, और rehabilitation science की समझ में है — न कि सिर्फ़ नाम के आगे “Dr.” लिखने में। BPT पढ़ने का मकसद “Doctor” बनना नहीं, बल्कि “Patient की functional ability और quality of life सुधारना” होना चाहिए।

📚 3. जब उद्देश्य गलत हो, तो सीखना सतही रह जाता है:

जो विद्यार्थी सिर्फ़ “Doctor” की उपाधि के लिए कोर्स करते हैं, वे:

Anatomy और Physiology को सिर्फ़ परीक्षा तक सीमित रख देते हैं
❗Patient communication और clinical skills में कमजोर रह जाते हैं
❗Internship को formalities की तरह निभाते हैं
❗Research, evidence-based practice या advanced learning में रुचि नहीं लेते

🚫ऐसा mindset आगे चलकर profession की credibility को नुकसान पहुंचाता है।

🧠 4. असली ‘Doctor’ वो, जो सोचता है – “मैं मरीज की मदद कैसे कर सकता हूँ”, चाहे Physiotherapist हो, Dentist, या MBBS Doctor — असली “Doctor” वो नहीं जो prefix लगाता है, बल्कि वो जो patients की suffering कम करता है। एक Physiotherapist को अगर society में respect पाना है, तो उसे अपने काम और competence से पहचान बनानी होगी, न कि सिर्फ़ title से।

🌿 5. नए BPT  Students के लिए संदेश:

यदि आप BPT में प्रवेश ले रहे हैं, तो ये सवाल खुद से पूछिए:

❔क्या मुझे human anatomy और movement science में genuine interest है?

❔क्या मैं लोगों के pain को कम करने में योगदान देना चाहता हूँ?

❔क्या मैं lifelong learner बनने के लिए तैयार हूँ?

अगर उत्तर “हाँ” है, तो आप सच में Physiotherapy के योग्य हैं।
अगर सिर्फ़ “Doctor” शब्द के लिए आए हैं — तो सोच बदलनी पड़ेगी।

🔑 निष्कर्ष:
BPT कोर्स सिर्फ़ नाम के आगे “Dr.” लिखने का साधन नहीं है, बल्कि मानव शरीर की कार्यक्षमता को पुनः स्थापित करने की कला है। जब students इस बात को समझेंगे, तभी समाज Physiotherapists को सही सम्मान देगा — और profession की dignity वास्तव में बढ़ेगी।

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