Monday, November 12, 2018

फिजियोथेरेपी के अंतर्गत विद्युत चिकित्सा पद्दति और इसके लाभ


     फिजियोथेरेपी के अंतर्गत उपचार के रूप में इलैक्ट्रोथैरेपी में विद्युत ऊर्जा का उपयोग किया जाता है । इलैक्ट्रोथैरेपी का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में कई प्रकार के इलाजों में किया जा सकता है , इसे विद्युत चिकित्सा भी कहते हैं । विद्युत चिकित्सा मुख्य रूप से माँसपेशियों में ऐंठन , रक्त परिसंचरण को बढ़ाने के लिए , माँसपेशियों में उत्तेजना को बनाए रखने और गति की सीमा बढ़ाने में वृद्धि के लिए और पुरानी तथा पेचीदा दर्द के प्रबन्धन , घाव के तीव्र दर्द , पोस्ट सर्जिकल तीव्र दर्द , घाव भरने और तत्काल शल्य चिकित्सा के रूप में किया जाता है । इन्फ्रारेड किरणें मुलायम ऊतकों की चोट के लिए इस चिकित्सा विधि का उपयोग किया जाता है , विशेषकर जब तक मुलायम ऊतक की चोटों से सूजन खत्म नहीं हो जाती है । इस विधि में विद्युत - चुम्बकीय तरंगों का उपयोग किया जाता है । इसमें किरणों की तरंगों की लम्बाई 40 लाख ऐम्पियर से 7700 प्रदान करने वाले उपकरण से यह किरणें ली जाती हैं , जैसे — सूर्य , विद्युतीय हीटर आदि । इन्फ्रारेड लैम्प का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है । यह किरणें जिससे प्रकाशित होकर स्वयं उत्सर्जित होती हैं , इसका उपयोग रोज 10 - 20 मिनट तक चोटग्रस्त भाग पर किया जाना चाहिए । अगर इन किरणों को 90 डिग्री कोण से त्वचा पर डाला जाए तो सबसे अधिक प्रभावी होता है । यह किरणें दो प्रकार के उपकरणों से निकलती हैं — ( 1 ) अप्रकाश युक्त उपकरण , ( 2 ) प्रकाशयुक्त उपकरण ।

इन्फ्रारेड किरणों के साथ चिकित्सा उपचार:
( 1 ) चयापचय – चयापचय जीवन समर्थन प्रक्रिया है । शरीर में कई तरह के पदार्थ का आदान - प्रदान जिसके द्वारा होता है । इस प्रक्रिया को इन्फ्रारेड किरणे सुचारु रूप सक्रिय कर देती हैं । 
( 2 ) रक्त परिसंचरण – रक्त परिसंचरण में यह किरणें सुधार लाती हैं और इस संस्था की मजबूत और अपशिष्ट पदार्थों और हानिकारक वसा को समाप्त कर सकते हैं । 
( 3 ) उच्च रक्तचाप- उच्च रक्तचाप और धमनी काठिन्य मध्यम आयु वर्ग के लोगों हृदय रोग और गुर्दे की परेशानी का मुख्य कारण होते हैं । रक्त परिसंचरण में सुधार से रक्तचाप को कम करने में सहायता करती है । ऊष्मीकरण के प्रभाव से स्वत : तन्त्रिका प्रणाली काफी हद तक इसमें मदद करती है । 
( 4 ) निम्न रक्तचाप – व्यक्ति को थकान व लगातार चक्कर आना कम रक्तचाप के लक्षण हैं । इस स्थिति में आराम और पर्याप्त नींद के अतिरिक्त अन्य कोई इलाज नहीं । फिर भी आप इस परेशानी से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इन्फ्रारेड किरण की गर्मी से उपचार के दौरान पसीने को बढ़ावा देने से इसे सामान्य करने के लिए मदद मिलती है । 
( 5 ) कैंसर की रोकथाम- हर व्यक्ति के शरीर में कुछ स्वस्थ कोशिकाओं के बीच में कैंसर की कोशिकाएँ मिश्रित होती हैं । यह माना जाता है कि यदि हम कमजोरी की स्थिति में अधिक खाने से और थकान में हैं तो हानिकारक खाद्य उत्पादों का उपयोग व संचय करने से कैंसर की सम्भावना हो सकती । स्वस्थ कोशिका को नुकसान पहुँचाए बिना इन्फ्रारेड किरणों के द्वारा कमजोर कैंसर की कोशिकाओं को समाप्त किया जा सकता है ।  
( 6 ) मधुमेह - चयापचय समस्याओं के कारण मधुमेह रोग होता है , इसका परिणाम तत्काल नहीं मिलता । यह रोग भी इन्फ्रारेड किरणों के कारण आने वाले पसीने से धीरे - धीरे कम करके इसके लक्षणों को कम करने में बहुत उपयोगी होती है । | 
( 7 ) रजोनिवृत्ति — चक्कर आना , सिर में दर्द और घबराहट महसूस करना जैसे लक्षण को , जब किसी महिला की उम्र 40 - 50 वर्ष की हो जाती है , तब अनुभव करती है । लेकिन लक्षण इन्फ्रारेड किरण चिकित्सा के साथ - साथ समय की छोटी - सी अवधि के भीतर मुक्त किया जा सकता है । 
( 8 ) तनाव - लाखों लोगों की मृत्यु तनाव के कारण साल - दर - साल बढ़ती रही है सरल तनाव का परिणाम कई प्रकार की बीमारियाँ हैं । इन्फ्रारेड वेव किरणों के द्वारा तनाव को बहुत कम या खत्म किया जा सकता है और इसके उपयोग से पसीना निकलने और आराम करने से शारीरिक व मानसिक रूप से अपने को तनाव मुक्त कर सकते हैं , जिससे यह शरीर को अच्छा अनुभव करवाता है अर्थात् शरीर में स्फूर्ति व ताजगी का अनुभव होता है । 
( 9 ) यातायात दुर्घटनाओं के शिकार दुर्घटना से ग्रसित व्यक्तियों को स्वातन्त्र्य तन्त्रिका तन्त्र को नुकसान से बचने के लिए नकारात्मक आयन उपचार बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है । आयन उपचार स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के लिए सन्तुलित बनाए रखने के लिए सबसे लाभकारी उपाय है ।

इन्फ्रारेड किरणों से लाभ: 
( 1 ) हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ संरक्षण देकर प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार लाती है । | 
( 2 ) शरीर रक्षा प्रणाली के सुधार में वृद्धि कर कैंसर जैसे रोग की कोशिकाओं को रोकती है । 
( 3 ) इन्फ्रारेड किरण से ध्वनि काठिन्य के प्रभाव और वसा के गठन को रोकने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है । 
( 4 ) व्यक्ति के दर्द को कम करने व आराम देने में मदद करती है । 
( 5 ) त्वचा एवं ऊतकों में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है । 
( 6 ) इस विधि से दीप्तिमान ऊर्जा को अवशोषित कर ऊष्मा का उत्पादन किया जाता है । 
( 7 ) वृहत् क्षेत्रों में तापीय त्वचा संवेदना की क्षति होती है । 
( 8 ) चयापचय बढ़ता है , जिसका सीधा सम्बन्ध ऊर्जा से है और ऊर्जा का सम्बन्ध ऊष्मा से है जिससे शरीर के ताप को बढ़ाने में सहायता मिलती हैं । 
( 9 ) इसके अतिरिक्त इन्फ्रारेड किरणों के द्वारा कई अन्य बीमारियों को कुछ हद तक ठीक किया जा सकता है जिनमें निम्नलिखित हैं - गठिया , लकवा , मधुमेह , लाइम एकाधिक काठिन्य और धमनी की सख्य प्रगतिशीलता आदि ।

No comments:

Post a Comment